मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

लोकसभा चुनाव 2014 : भाग-19----नरेंद्र मोदी : स्त्री अंकों की बाधा

जय श्री राम …………| आदरणीय मित्रो, प्रस्तुत है इस शृंखला की अंतिम कड़ी के रूप में भाग-19| इस भाग में हम बात करते हैं भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की| यह बात हम ‘अखिल भारतीय सरस्वती ज्योतिष मंच’ की ओर से जालंधर (पंजाब) में 27-28-29 दिसंबर, 2013 को आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के तीसरे और अंतिम दिन 29 दिसंबर और धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में 27-28 जुलाई, 2013 को आयोजित ज्योतिष सम्मेलन के दूसरे दिन 28 जुलाई तथा ‘ऑल इंडिया ऐस्ट्रॉलजर्स फेडरेशन’ की ओर से 22-23 फरवरी, 2014 को अहमदाबाद (गुजरात) में आयोजित ’70 वें राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन’ के पहले दिन 22 फरवरी को अपने व्याख्यान में प्रस्तुत कर चुके हैं| यह बात हमारे द्वारा प्रकाशित होने वाले अंक ज्योतिष और बॉडी लैंग्वेज पर आधारित देश के एकमात्र अख़बार ‘अंक प्रभा’ के फरवरी, 2013 के अंक में और हमारे ब्लॉगों पर दिनांक 15 जनवरी, 2013 को कुछ इसी रूप में प्रकाशित हो चुकी है|        
             
  जन्म-दिनांक:-17-09-1950
मूलांक:-8                भाग्यांक:-5                आयु अंक:-1 (64 वाँ वर्ष)                 नामांक:-9 (नरेंद्र दामोदरदास मोदी)           नामांक:-5 (नरेंद्र मोदी)                 जन्म का चलित अंक:-5 (-)                 चलित दशा:-अंक 6 (वर्ष 2014 से वर्ष 2019 तक)

                गुजरात के मौजूदा मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का पूरा नाम ‘नरेन्द्र दामोदरदास मोदी’ है| हमने यहाँ गणना में इसी नाम को काम लिया है| सबसे पहले तो हम इन्हें यही राय देंगे कि ये अपना नाम 'नरेंद्र मोदी' कि बजाय 'नरेंद्र दामोदरदास मोदी' लिखें| 'नरेंद्र मोदी' का मूलांक बनता है-5| इसका वृहदंक है-41| यहाँ पितृदोष युति बनी है और वह भी अस्थिरताकारी| यह तो वही बात हुई कि 'करेला और नीम चढ़ा'| इसी के कारण मोदी के अपने/पार्टी के पितृ पुरुषों के साथ पंगे होते हैं| 'नरेंद्र दामोदरदास मोदी' का मूलांक बनता है-9| इसका वृहदंक है-72| यहाँ अंक 9 बनना और वह भी स्त्री अंकों से| इसे कहेंगे 'चुपड़ी और दो-दो'| ये दोनों ही बातें मोदी के लिए बहुत शुभ हैं| यह 'नरेंद्र मोदी' नाम के अंकों का ठीक विपरीत है| ऐसा करने से मोदी के स्त्री अंकों वाली बाधा भी नियंत्रित हो जाएगी| अब मोदी को इसके अलावा और क्या चाहिए? तो अब लगे हाथों मोदी के यहाँ इस स्त्री बाधा की चर्चा भी कर लेते हैं| स्त्री अंकों की बाधा का मतलब चार प्रकार से है| (1) सशरीर स्त्री बाधा, मतलब कोई स्त्री ही प्रधानमंत्री बन जाए या कोई स्त्री मोदी को प्रधानमंत्री न बनाए जाने को लेकर अड़ कर बैठ जाए या कोई स्त्री अपने दल समर्थन देने की शर्त मोदी को प्रधानमंत्री न बनाया जाना रख दे (2) साथ आने के लिए अन्य दल मोदी को प्रधानमंत्री न बनाये जाने की शर्त रख दे (3) अपने ही दल के साथी मोदी को प्रधानमंत्री न बनाये जाने के लिए अड़ जाएँ (4) स्त्री अंकों वाले पुरुष अपनी भूमिका में मोदी के विमुख हो जाएँ| यहाँ स्त्री अंकों की प्रधानता वाले दो वाले लोगों पर विशेष ध्यान देना होगा| पहले तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भगवत (मूलांक 2 व भाग्यांक 8) और दूसरे श्री लालकृष्ण अडवाणी (मूलांक 8 व भाग्यांक 2)| इनके मूलांक-भाग्यांक मिल कर एक शृंखला बनाते हैं| अतः चुनावी-परिणाम आने के बाद देश का अगला प्रधानमंत्री बनाये जाने के मामले में इन दोनों की बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका रह सकती है|                 
                   मोदी का जन्म का मूलांक 8 बना है 17 से| यहाँ नेतृत्व और सत्ता के प्रतिनिधि पुरुष अंक 1 के साथ स्त्री अंक 7 की युति बन रही है| यह युति अच्छी नहीं होती है| यह स्त्री अंक खराब कर देती है| नरेन्द्र मोदी के यहाँ भी यही हुआ है| इस युति के कारण इनके स्त्री अंक भ्रष्ट हो गये| इसका तात्पर्य यह होता है कि ऐसे जातक को लक्ष्य-प्राप्ति में अपने ही दल के साथी लोगों/साथी दलों के लोगों या स्त्री से बाधा आती है| इसी लिए जब भाजपा के सहयोगी दल के नीतीश कुमार नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री पद के लिए विरोध करते हैं तो यह हमारे लिए तनिक भी आश्चर्य का विषय नहीं है| साथ ही यदि मोदी की पार्टी के ही कुछ लोग भी उनका (प्रत्यक्ष या प्रच्छन्न) विरोध करें तो यह भी हमारे लिए कोई अजूबा नहीं है| यहाँ एक ख़ास बात और| मोदी का मूलांक 8 अंक 6 से मित्रता रखता है| भ्रष्ट अंक 6 से अंक 8 की यह मित्रता और भी गहरी होती है| अतः ऐसे लोग जिनका अंक 6 प्रबल है या जिनका अंक 6 भ्रष्ट है, वे मोदी की प्रधानमंत्री पद की यात्रा में इनके अनपेक्षित रूप से सहयोगी बन सकते हैं| वे मोदी के साथ आ सकते हैं, भले ही एन डी ए के अन्दर आ कर साथ दें या फिर बाहर से| इस परिभाषा के दायरे में जयललिता, चंद्रबाबू नायडू, ओम प्रकाश चौटाला, राज ठाकरे, नवीन पटनायक, जगन मोहन रेड्डी व चन्द्र शेखर राव (तेलंगाना राष्ट्र समिति) आते हैं|
                   अब बात करते हैं नरेन्द्र मोदी के यहाँ के ‘शत्रु हन्ता’ योग की| यदि यह कहें कि मोदी के जीवन का सब कुछ यही है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी| मोदी के जन्म का मूलांक 8, इसके वृहदंक 17 का अंक 1 पितृ द्रोह रूप में ‘शत्रु योग’ बना रहा है| इनके जन्म का मासांक 9 की इन अंकों के साथ युति इस योग को ‘शत्रु हन्ता योग’ में परिवर्तित देती है| इस योग का फलितार्थ यह है कि जो व्यक्ति मोदी से आमने-सामने की टक्कर लेगा, वह ‘निपट’ जाएगा| यदि उसके यहाँ अंक बलिष्ठ हैं तो वह कम नष्ट होगा या धीरे-धीरे नष्ट होगा| यदि उस व्यक्ति के अंक दुर्बल हैं तो वह जल्दी नष्ट होगा और यदि उस व्यक्ति के अंक निर्बल हैं तो वह हाथोंहाथ निपट जाएगा| इस बात को मोदी के निजी जीवन से लेकर राजनीतिक जीवन तक, हर जगह आसानी से देखा और समझा जा सकता है| हमने नरेन्द्र मोदी के जीवन का पहली बार अध्ययन गुजरात विधानसभा के चुनाव (वर्ष 2007) में किया था| उस आधार पर हमने जो-जो बातें कही थीं, तक़रीबन वे सभी सही ठहरी थीं| इसी ‘शत्रु हन्ता योग’ के कारण मोदी का विरोध करने वाले एक-एक कर निपट गये| इसी सिलसिले में एक-आध बात और देखिए| जो लालकृष्ण अडवाणी मोदी के GODFATHER माने जाते हैं, जब उन्होंने मोदी से मुँह फेर कर नीतीश की तरफ रुख़ किया तो कई चक्करों में घिर गये| अंततः सार्वजनिक रूप से उन्होंने मोदी की स्वीकार्यता को स्वीकारा| यही हाल नीतीश कुमार का हो रहा है| जब से उन्होंने मोदी के ख़िलाफ़ बोलना शुरू किया है, तब से वे मुसीबतों में घिरते जा रहे हैं| प्रचंड बहुमत के बाद भी अपने ही राज्य में नीतीश यात्रा तक सफलतापूर्वक नहीं कर पा रहे हैं, क्या यह घोर आश्चर्यजनक नहीं है? आपके लिए हो सकता है, हमारे लिए नहीं| हमने अपने ब्लॉगों पर यह भविष्यवाणी करते हुए नीतीश कुमार को यह सलाह चेतावनी के रूप में दी भी थी कि अंक 8 में शपथ लेने वाले वे (नीतीश) अंक 8 वाले नरेन्द्र मोदी से टक्कर ना लें, वरना उनके लिए संकट बढ़ जाएँगे| अब सब कुछ वही हो रहा है| एक बात हम यहाँ लगे हाथों और कहा दें| भाजपा में ऐसा ‘शत्रु हन्ता योग’ दो और लोगों के यहाँ है; वसुंधरा राजे सिंधिया के यहाँ मोदी से ‘बहुत थोडा-सा कम’ और येद्दियुरप्पा के यहाँ कुछ कम| इसलिए वसुंधरा राजे के यहाँ भी मोदी वाला मामला ही है| येद्दियुरप्पा भी अपने इसी योग के कारण फिर से कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे; भले ही चाहे विधानसभा चुनाव से पहले बनें या फिर बाद में; भले ही चाहे उन्हें फिर से मुख्यमंत्री भाजपा बनाए या फिर कोई और| चूँकि येद्दियुरप्पा के यहाँ यह ‘शत्रु हन्ता योग’ कुछ कम है, इस लिए अब तक वे खुद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए, हालाँकि इसी योग के कारण येद्दि के पद-त्याग के बाद कर्नाटक में मुख्यमंत्री उन्हीं की पसंद के ही बने|
                  यहाँ मोदी के स्त्री अंकों के बारे में यह बात कहना भी बहुत ज़रूरी है कि इन्हीं भ्रष्ट स्त्री अंकों के कारण ही मोदी का दाम्पत्य नहीं है| इन अंकों की यह अवस्था शादी नहीं होने देती| यदि कुछ सहयोगी अंकों के कारण हो जाए तो कामयाब नहीं होने देती| नरेन्द्र मोदी के साथ यही हुआ| जसोदाबेन से शादी होने के बाद भी ये दोनों तलाकनुमा जीवन जी रहे हैं यानि दाम्पत्य का सुख मोदी को नहीं मिल रहा है| स्त्री अंकों की यह अवस्था जहाँ निजी जीवन में दाम्पत्य-सुख नहीं लेने देती, वहीं दूसरी ओर करियर में कुछ ऊँच-नीच के बाद लाभ देती है| इन्हीं स्त्री अंकों से सम्बन्धित एक अद्भुत बात का यहाँ उल्लेख करना भी प्रासंगिक रहेगा| नरेन्द्र मोदी के नामांक 9 का वृहदंक 27 इन्हीं स्त्री अंकों से बना है| मोदी के मुख्यमंत्री बनने में इन स्त्री अंकों की हमेशा महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है| मोदी पहली बार मुख्यमंत्री बने 07-10-2001 में| यहाँ मूलांक 7 व भाग्यांक 2 था| आयु अंक भी 7 था| मोदी दूसरी बार मुखमंत्री बने 22-12-2002 को| यहाँ मूलांक 4 व भाग्यांक 2 तथा राज्य का आयु अंक 7 था| मोदी के तीसरी बार बनने की दिनांक थी 25-12-2007| यहाँ मूलांक 7| आप ख़ुद ही देख लीजिए कि करियर के मामले में मोदी पर इन स्त्री अंकों की किस क़दर कृपा रही है| मोदी अंक पहली बार मुख्यमंत्री बने तब इनका आयु अंक 7 (52 वाँ वर्ष) व राज्य का आयु अंक 6 (42 वाँ वर्ष) था| इनके दूसरी बार मुख्यमंत्री बनते समय इनका आयु अंक 8 (53 वाँ वर्ष) व राज्य का आयु अंक 7 (43 वाँ वर्ष) था| इसी प्रकार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनते समय इनका आयु अंक 4 (58 वाँ वर्ष) और राज्य का आयु अंक 3 (48 वाँ वर्ष) था| इस प्रकार यह स्पष्ट है कि स्त्री अंक 7 ने मोदी के करियर में तो फ़ायदा ही दिया| वर्ष 2015 से गुजरात को अंक 7 की दशा आरम्भ होगी, जो कि वर्ष 2021 तक चलेगी| यह राज्य के मूलांक-भाग्यांक के साथ विपरीत युति बनाती है| दूसरी बात यह कि जिस प्रकार स्त्री अंक 7 की विशिष्ट भूमिका में ही मोदी का स्थान बदला और वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने; ठीक उसी प्रकार इसी स्त्री अंक 7 की पुनः विशेष भूमिका में मोदी का फिर स्थान बदलेगा|
                  यहाँ एक रोचक चर्चा अपने लिए स्थान मांगती है| मनमोहन सिंह और नरेन्द्र मोदी के मूलांक-भाग्यांक में 8-5 की अद्भुत समानता है| इसी अतिशय समानता के कारण मोदी मनमोहन सिंह को रिप्लेस करने में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे| यहाँ इनके मार्ग में इनसे पहले कोई अन्य व्यक्ति प्रधानमंत्री के रूप में सामने आ सकता है| यह व्यक्ति अंक 5, अंक 6 व अंक 8 की प्रधानता वाला होगा| मोदी के मार्ग में ‘स्त्री-बाधा’ का अर्थ शरीर से स्त्री भी संभव है| पहले इस ‘सशरीरी अवस्था’ की ही बात कर लेते हैं| इस दायरे में दो महिलाएँ आती हैं| पहली तो ममता बनर्जी और दूसरी सुषमा स्वराज| ममता बनर्जी के यहाँ मूलांक-भाग्यांक में अंक 5 व अंक 8 है तथा इनका जन्म अंक 8 के समय में हुआ है, किन्तु यह अंक 5 उनकी बॉडी लैंग्वेज में मृत अवस्था में होने के कारण अर्द्ध प्रभावी हो गया| एक और बात है| ममता बनर्जी के यहाँ अंक 6 की कोई भूमिका नहीं है| इसी कारण इनका शरीर सूखी हुई अवस्था में है| अतः ममता बनर्जी स्वयं 'प्रधानमंत्री बनने' के रूप में मोदी के मार्ग में बाधा नहीं बन पाएँगी, किन्तु समर्थन देने के मुद्दे पर मोदी की राह में अड़ंगा लगा सकती हैं| अब रही बात सुषमा स्वराज की; तो इनके यहाँ मूलांक-भाग्यांक में अंक 5-6 है तथा इनका जन्म अंक 8 के समय में हुआ है| इनकी बॉडी लैंग्वेज में भी अंक 5 व अंक 6 प्रभावी अवस्था में है| अतः नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री पद के बीच में सुषमा स्वराज आ जाएँ तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए| श्रीमती स्वराज का कार्यकाल 14-15 से 26 महीनों का रह सकता है|हाँ, यदि सुषमा स्वराज अपने आपको पीछे कर लें या उन्हें पीछे कर दिया जाएतो नरेन्द्र मोदी सीधे-सीधे प्रधानमन्त्री बन सकते हैं | नरेन्द्र मोदी के लिए कैलेण्डर वर्ष 2015-2016 बहुत ख़ास भूमिका निभा सकते हैं| तब इन्हें उम्र का 65-66-67 वाँ वर्ष चल रहा होगा यानि इनका तब इनका आयु अंक 2-3-4 चल रहा होगा| यह अवधि मोदी को गुजरात से दिल्ली भेज कर प्रधानमंत्री पद पर बिठा सकती है|  नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थकों को यह सुप्रसिद्ध कहावत हमेशा याद रखनी चाहिए कि ‘रमजान में बचेंगे तो ईद मनाएँगे’| तात्पर्य यह है कि मोदी को अपनी प्राण-रक्षा की तरफ़ पर्याप्त ध्यान देना चाहिए| वे सशरीर सुरक्षित रहेंगे, तभी तो प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो पाएँगे| 17 जून, 2013 से वर्ष 17 सितम्बर, 2021 तक की अवधि में इनके प्राणों को ख़तरा है|
                 मित्रो, यह चर्चा बहुत लम्बी हो गयी है| अब इसे यहीं विराम देते हैं| वास्तव में कौन प्रधानमंत्री बनेगा, यह तो 16 मई से आने वाले चुनाव-परिणाम पर निर्भर करेगा| हमने अपने ज्योतिषीय कर्म का निर्वहन करते हुए देखेंगे राष्ट और समाज के हित में इस बारे में एक अंक ज्योतिषीय आकलन प्रस्तुत किया है और इसे इसी रूप में लीजिएगा, यही निवेदन है| हमने पूरी सत्यनिष्ठा से इसे व्यक्ति/दल-निरपेक्ष रखा है| यह भविष्यवाणी यदि किसी दल/व्यक्ति के पक्ष/विपक्ष में जाती है तो यह ज्योतिषीय संयोगमात्र है| आज बस इतना ही| ......... आज के आनंद की जय| ............ जय श्री राम|