मंगलवार, 30 मार्च 2010

श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ

 जय श्री राम ............ | आदरणीय मित्रो, आप सभी को श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ ......... | आप जैसे हमारे शुभचिन्तक कई बार पूछते हैं कि हम जो ये ' घोटेवाले ' लिखते हैं,ये कौन हैं ? तो मित्रो,लीजिए-आज आप की सेवा में हम यह बात भी खुली कर देते हैं | हमारे ये ' घोटेवाले ' हैं---परम रामभक्त श्री बजरंग बली | राजस्थानी भाषा में 'घोटा'  कहते हैं 'गदा' को | तो गदाधारी बजरंग बली हुए ' घोटेवाले ' |
                     कलयुग में तीन जाग्रत देवता हैं---शनि,भैरव और हनुमान | इन में भी सर्वाधिक प्रभावकारी भूमिका में हनुमान जी महाराज माने जाते हैं | भौतिक देह की गणना में हनुमान जी भगवान राम से आयु में पाँच वर्ष बड़े थे | इन की महिमा क्या कही जाए ? गोस्वामी जी ने तो लिखा भी है---" चारों जुग परताप तुम्हारा,है परसिद्ध जगत उजियारा " | समर्पण,निष्ठा और स्वामिभक्ति की इन से बड़ी मिसाल भला कहाँ मिलेगी | हम तो इन के लिए सदैव कहते भी हैं---" ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे " | इन्हें अपनी भक्ति की अपेक्षा अपने स्वामी भगवान श्री राम की भक्ति अधिक प्रिय है | इसलिए आइए,सब से पहले कहें---" श्री राम जय राम जय जय राम " | अब हम करते हैं पवनपुत्र की स्तुति ( यहाँ स्तुति के पाठ में कुछ शब्दों में 'म' के ह्लंत/अनुस्वार सम्बन्धी त्रुटी है | यह हमारी टाइपिंग की विवशता के कारण है | हम हिंदी टाइपिंग नहीं जानते,फोनेटिक टाइपिंग से काम चलाते हैं | इस की कुछ अपनी सीमाएँ हैं | इस कारण वर्तनी सम्बन्धी ये त्रुटियाँ रह जाती हैं | इन के लिए हम बजरंग बली और आप सभी से क्षमा चाहते हैं )--------            

            " प्रनवउं पवन कुमार खल बन पावक ग्यानघन |
               जासु ह्रदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ||
               अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम
                          दनुजवनकृशानुम ग्यानिनामग्रगण्यम |
                सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम 
                          रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ||
               गोष्पदीकृतवारीशं मशकीकृतराक्षसं |
                           रामायण महामलारत्नम  वन्दे-निलात्मजम || 
               जनानन्दम वीरं जानकीशोकनाशनं |
                           कपीशमक्षहन्तारं  वन्दे लंकाभयंकरम ||
                उल्लंघ्य सिंधो: सलिलं सलीलं 
                           य: शोकवह्निम जनकात्मजाया: |
                आदाय तेनैव ददाह लंकाम
                           नमामि तं प्रांजलिरांजनेयम ||
                मनोजवं मारुततुल्यंवेगम जितेन्द्रियं बुद्धि मतं वरिष्ठं |
                        वातात्मजं वानरयूथमुख्यम श्रीरामदूतं शरणम प्रपद्ये ||
                आंजनेयमति पाटलाननम कान्चनाद्रिकमनियविग्रहम |
                पारिजाततरुमूलवासिनम भावयामि   पवमाननन्दम || 
                यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्ताकांजलिम |
                वाष्पवारिपरिपूर्णलोचनं मारुतिम नमत राक्षसान्तकम  || " 
                                      आज बस इतना ही |  .......... आज के आनंद की जय | ................. जय श्री राम |