जय श्री राम ............ | आदरणीय मित्रो,आज हम एक बार फिर उपस्थित हैं आप की सेवा में अपने वचन के अनुसार | कई दिनों से जो बात करने की चर्चा कर रहे थे,अब वह बात करने का समय भी आ गया है | हम ने कहा था कि हम आप से उस अप्रतिम विभूति की चर्चा करेंगे,जिस ने असंख्य लोगों का जीवन ही बदल कर रख दिया | इस आलेख के शीर्षक से ही आप समझ गये होंगे की हम किन की बात कर रहे हैं ? जी हाँ,हम आज आप से बात करने जा रहे हैं 'शिरडी वाले साई बाबा' की | जिन के दिये दो मूल मन्त्रों---'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धीरज)---के सहारे न जाने कितने लोगों का जीवन शक्तिमय है | बाबा को किसी प्रकार की चर्चा में सीमित कर पाना हमारी क्षमताओं से सर्वथा बाहर की बात थी | ऐसा कर पाने के लिए हम ने उन्हीं से अनुमति ली | यह हमारा सौभाग्य है कि हमें उन की अनुमति मिली | इस से भी बढ़ कर हम तो यह कहेंगे कि इस आलेख के लिए हमें उन का ही आदेश मिला है | हम जो अब यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं,यह उन्हीं की प्रेरणा से हो रही है | तो आइए,साई नाथ का नाम ले कर आरम्भ करते हैं यह पावन चर्चा |
जन्म-दिनांक सम्बन्धी विभिन्न मत
बाबा की जन्म-दिनांक को ले कर विभिन्न मत प्रचलित हैं | हमें बाबा की तीन जन्म-दिनांक मिलीं | एक थी 18-05-1837,रात्रि 08 बजे,ग्राम-पथरी,महाराष्ट्र | दूसरी थी 28-09-1835 | तीसरी थी 27-09-1838,आन्ध्र प्रदेश | हम कई दिनों तक तो इस जन्म-दिनांक-पहेली को हल नहीं कर पाये | फिर उसी युक्ति को काम लिया | कौनसी ? अरे वही,'तेरा तुझ को अर्पण' वाली | हम ने यह दायित्व बाबा पर ही छोड़ दिया कि वे स्वयं बताएँ कि उन की सही जन्म-दिनांक क्या है ? इस के बाद फिर उन्हीं की कृपा से हमें सही जन्म-दिनांक मिली | हाँ,दिनांक ही,जन्म-स्थान नहीं | हम ने बाबा की जन्म-दिनांक के रूप में 27-09-1838 को पाया | फिर जब अंक ज्योतिषीय विश्लेषण की कसौटियों पर कसा तो वहाँ भी इसे खरा पाया | अभी यहाँ 'जन्मांक-नामांक विश्लेषण' में आप स्वयं इस बात के साक्षी बनेंगे | हाँ,इस जन्म-दिनांक के साथ जुड़े स्थान (आन्ध्र प्रदेश ) से हम सहमत नहीं हैं |
जन्मांक-नामांक विश्लेषण

अब बात करते हैं बाबा की जन्म की अंक कुंडली की | यहाँ हम सब से पहले चर्चा करेंगे 'पितृद्रोह युति' यानि 'GODFTHER PROBLEM ' की | यह दो प्रकार की होती है---(1) उच्चस्थ,और (2) निम्नस्थ | (1) उच्चस्थ:---इस का तात्पर्य यह है कि जातक को अपने पिता,पिता-समक्ष,संरक्षक,गुरु या ख़ैर-ख्वाह का सुख नहीं मिलता है | (2) निम्नस्थ:---जातक स्वयं जिन का पितृ-परुष यानि पिता,पिता-समकक्ष,गुरु,संरक्षक या ख़ैर-ख्वाह होता है,उन के कारण उसे दुःख उठाना पड़ता है | यह 'पितृद्रोहात्मक युति' जितनी प्रबल होती है,यह सुख उतना ही कम मिलता है | अभी पहले हम बाबा के यहाँ इस युति की उच्चस्थ अवस्था का विश्लेषण करते हैं ,निम्नस्थ अवस्था का विश्लेषण उन के देहांत के अंकों के विश्लेषण के समय करेंगे | बाबा की अंक कुंडली में अंक 1 के साथ दोहरी भूमिका में अंक 8 बैठा है | इस से पितृद्रोह की अवस्था बहुत प्रबल हो गयी है | यह बात इन के जीवन-वृत्त की घटनाओं से भी सिद्ध होती है | इस का सब से पहला प्रभाव दिखता है कि इन के पिता श्री गंगा भावडिया इन्हें इन के जन्म से पहले ही (गृह-त्याग के रूप में) छोड़ कर चले गये थे | तो इन्हें पिता का सुख कहाँ मिला ? फिर जिस मुस्लिम परिवार ने इन्हें अपनाया,उस का मुखिया भी इन्हें अपनाने के मात्र चार साल बाद ही चल बसा | हुआ भी क्या था उसे ? दो-चार दिन बस मामूली बुख़ार | तो बाबा को यहाँ भी पितृ-सुख नहीं मिला | इस के बाद पालनहारी मुस्लिम माँ ने वेकुशा महाराज (कुछ मतों के अनुसार बैकुंठ महाराज) के आश्रम में डाल दिया | मगर यह सुख भी बाबा के भाग्य में अधिक कहाँ लिखा था ? मात्र 12 वर्षों के बाद ही ये महाराज भी स्वर्ग सिधार गये | अब यह बालक ( हमारे साई बाबा ) पूर्णतः पितृ-विहीन हो गये | तो ऐसा होता है कुण्डली की इस 'पितृद्रोह युति' का फल | ठीक ऐसा ही गोस्वामी तुलसीदास जी के साथ भी हुआ था | मित्रो,हम ने जो आप से निवेदन किया था न कि बाबा की यह जन्म-दिनांक हमें सही लग रही है,तो उस का कारण भी यहाँ हम ने बता दिया है | अब आप स्वयं ही देखिए कि बाबा के अब तक के इस जीवन-वृत्त से क्या ऐसा सिद्ध नहीं हो रहा है ? इस लिए ही तो बाबा ने स्वयं हमें अपनी सही जन्म-दिनांक की प्रेरणा दी या बतायी

देहांत
तीसरा जन्म कब ?
मित्रो,आप आश्चर्य कर रहे होंगे कि साई बाबा के पुनर्जन्म के क्रम में हम दूसरे जन्म की बजाय यह तीसरे जन्म का जिक्र क्यों कर रहे हैं ? इस बात से तनिक भी आश्चर्य-चकित मत होइए,क्यों कि बाबा का दूसरा जन्म तो आज से लगभग चौरासी साल पहले हो चुका है | इस बारे में हम अगले आलेख में विस्तार से चर्चा करेंगे | आप ही बताइए कि जब दूसरा जन्म हो चुका है तो हम तीसरे जन्म के बारे में ही तो बात करेंगे न | बाबा का पहला जन्म हुआ अंक 2 के वर्ष में यानि कि वर्ष 1838 में | बाबा का दूसरा जन्म हुआ अंक 9 के वर्ष में यानि कि वर्ष 1926 में | 'पुनर्क्रम निर्धारण विधि' से बाबा का अगला जन्म अब फिर से अंक 2 के ही वर्ष में होना है | अब प्रश्न उठता है कि यह वर्ष कौनसा होगा ? तो यह जानने के लिए बाबा के पहले जन्म के अंकों की शरण में चलते हैं | बाबा के पहले जन्म के मूलांक का वृहदंक है-27 व वर्ष का वृहदंक है-20 | इस युति को पहले तो सीधे-सीधे देखें तो यह वर्ष बनता है-2720,जो कि दूसरे जन्म की वर्तमान अवस्था को दृष्टिगत रखते हुए संभव नहीं है,क्यों कि दैहिक धर्म की भी अपनी सीमा होती है | बाबा के दूसरे जन्म के शरीर की वर्तमान अवस्था लगभग चौरासी साल है,और वर्ष 2720 से कुछ वर्ष पहले भी इस की पूर्णाहुति मान ली जाए,तब भी यह देह-यात्रा लगभग 800 वर्ष की हो जाएगी,जो कि दैहिक धर्म के अनुकूल नहीं बैठ रही है | अब बात करते हैं दूसरे विकल्प की | दूसरा विकल्प यह है कि जन्म के वर्ष और मूलांक के संयुक्तांक की 'विरुद्ध युति' बना ली जाए | यह युति बनती है-वर्ष 2027 | बाबा के पहले जन्म के पहले जन्म के अंकों से ये दो ही विकल्प बनते हैं | इस प्रकार बाबा के तीसरे जन्म का वर्ष ठहरता है-2027 |

एक और विधि भी है | जन्म के कारक अंक होते हैं-1 व 2 | अंक 1 पुरुष व अंक 2 स्त्री का होता है | इन के मेल से अंक 3 का जन्म होता है | इस बात को सांसारिक या दैहिक स्तर पर इस प्रकार समझिए कि पुरुष व स्त्री के मेल से संतान पैदा होती है | तब अंक 1 पिता व अंक 2 माता का हो जाता है | उन के देहांत का भाग्यांक है-8 | उन के देहांत के वर्ष 1918 में इस अंक 8 को जोड़ देने से बाबा के अगले यानि दूसरे जन्म का वर्ष प्राप्त होता है-1926 | बाबा के पहले जन्म की आयु थी-81 वाँ वर्ष | इस में जन्म के कारक संयुक्तांक 12 को जोड़ दें तो आती है-संख्या 93 | यह बाबा के दूसरे जन्म के शरीर की आयु है | इस का तात्पर्य यह हुआ कि बाबा के दूसरे जन्म का देहांत होगा वर्ष 2019 में | अब इस में देहांत के कारक अंक 8 को जोड़ दिया जाए तो बाबा के अगले यानि तीसरे जन्म का वर्ष मिल जाता है | यह मिलता है-वर्ष 2027 | अब तनिक यह भी देख लिया जाए कि वर्ष 2027 में किस समय में बाबा फिर से अवतरित होंगे ? बाबा का पहला जन्म हुआ अंक 6 ( ऋणात्मक) में | उन का दूसरा जन्म हुआ अंक 3 (ऋणात्मक) में | अंक 3,6 व 9 के समूह का अब शेष रहा अंक है-9 | अब इसी का क्रम है | अंक 9 एक कैलेण्डर वर्ष में दो बार आता है | 21 मार्च से 20 अप्रेल (धनात्मक) और 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर (ऋणात्मक) | इस में भी 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर वाली अवधि अधिक जमती है,क्यों कि पहली बात तो यह कि इस में चलित की ऋणात्मकता की क्रमबद्धता जारी रहती है,दूसरी बात यह कि बाबा के पहले जन्म के देहांत के 9 वें वर्ष में दूसरा जन्म हुआ | अब तीसरे जन्म के वर्ष 2027 में इस परिधि में तो 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर वाला समय ही आ रहा है | इस में यदि संक्रमण काल के सात दिन सम्मिलित कर लिये जाएँ तो यह अवधि बढ़ कर 27 नवम्बर तक हो जाती है | उस दिनांक को गुरुवार,मंगलवार या शुक्रवार हो सकता है | इस नाते अक्टूबर महीने की 21 और नवम्बर महीने की 5,9,11,18 व 23 तारीख़ मिलती है | फिर भी मोटे तौर पर यह वर्ष 2027 ठहरता है | अब वास्तव में बाबा का जन्म किस दिन व दिनांक को होगा,यह तो स्वयं बाबा ही जानते हैं,हम ने तो बस अपनी तुच्छ बुद्धि से तनिक गणित लगा कर यह जानने का बस एक विनम्र प्रयास भर किया है | बाबा हमें इस धृष्टता के लिए अवश्य ही क्षमा कर रहे होंगे |



bahut hi gyanvardhak jaankaari di hain mitravar aapne
जवाब देंहटाएंसाई बाबा के विषय में अद्भुत जानकारी ,दुर्लभ चित्र ,संग्रहणीय लेख .
जवाब देंहटाएंBHAI GAJAB KAR DIYA.
जवाब देंहटाएंESE KAHTE H GYAN
AUR YEH HOTA H JYOTISH.
BAS AAP KISI VYAKTI AISE JANAKARI DE JO ES DESH KA BHAGAY BAD DALE? JO ES DESH SE BHARASHTA CHAR BHAGA DE? JO UNEMPLOYMENT DUR KAR DE?
JO CHARACTER BUILD KAR DE? JO KHUD BHI JIYE AUR AURO KO BHI JEENE DE.
jo bhi es sansar ko andhkar se door karta hai vahi bagavan hai.
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