बुधवार, 21 अप्रैल 2010

श्री शिरडी साई बाबा का दूसरा जन्म:श्री सत्य साई बाबा


जय श्री राम ........... | आदरणीय मित्रो,सब से पहले तो हम आप से इस बात के लिए क्षमा मांगते हैं कि अपने वादे के अनुसार हम आप की सेवा में यह आलेख कल प्रस्तुत नहीं कर सके | कल सुबह से हमारे यह 'प्रियतम बन्धु' इन्टरनेट भाई साहब ऐसे रूठे कि अभी तक रूठे हुए थे | अभी कुछ देर पहले ही माने हैं | अब दुआ कर रहा हूँ कि ये तब तक तो माने ही रहें कि जब तक यह पोस्ट आप की सेवा में उपस्थित न कर दें | ... तो हमारा आप से यह वादा था कि हम मंगलवार यानि कि बीते कल को आप से बात करेंगे श्री शिरडी साई बाबा के दूसरे जन्म की | तो एक दिन देर से ही सही,आज हम यह बात आप से करने जा रहे हैं | 09 अप्रेल,2010 के आलेख में हम ने आप के साथ विस्तार से यह चर्चा की थी कि श्री शिरडी साई बाबा के पहले जन्म का अंक ज्योतिषीय विश्लेषण क्या कहता है तथा इन का तीसरा जन्म कब होगा ? तब हम ने यह भी कहा था कि इन का दूसरा जन्म बहुत पहले हो चुका | यह जन्म है 'श्री सत्य साई बाबा' के रूप में | तो अब आज का सिलसिला यहीं से शुरू करते हैं | 
बात का आधार 
 हमारी इस बात पर कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है | अपनी-अपनी बात रखने का अधिकार सब को है | अगर यह अधिकार आपत्ति करने वालों को है,तो हमें भी अपनी बात रखने का अधिकार है;मगर हम एक बात का खुलासा बहुत साफ़ तौर पर कर देते हैं कि कोई आवश्यक नहीं है कि आप हमारा यह आलेख हमारी दृष्टि से देखें | आप इस आलेख को नितांत तटस्थ भाव से या किसी आलोचक भाव से भी देख सकते हैं | अब हम आप को बताते हैं कि सत्य साई बाबा को हम ने शिरडी साई बाबा का दूसरा जन्म क्यों माना ? सब से बड़ा कारण तो है शारदा देवी,चिंचोली नरेश,काका दीक्षित,उन के भतीजे एम.जी.दीक्षित आदि प्रकरण | इस के बाद कारण है हमारा विश्लेषण | इसी आलेख में हम ने यह विश्लेषण बहुत विस्तार से किया है | हमारी एक बात आप को कुछ विचित्र लग सकती है कि एक समय ऐसा भी था कि हमें सत्य साई बाबा के 'शिरडी साई बाबा के पुनर्जन्म' होने की बात पर बिलकुल भी विश्वास नहीं था | इस बात को तो छोडिए,हमें तो ज्योतिष पर भी विश्वास नहीं था | विज्ञानं के विद्यार्थी थे,इस लिए ज्योतिष,तंत्र,परा विद्याओं आदि को नितांत अविश्वास की दृष्टि से देखते थे | एक वह समय था,और एक यह समय है | आप स्वयं समझ सकते हैं कि 'वहाँ' से 'यहाँ' तक सफ़र हम ने ऐसे ही तो तय नहीं किया | कई कसौटियों पर परखा है सब कुछ | अब आप के मान में यह प्रश्न भी उठता होगा कि फिर कुछ लोग श्री सत्य साई बाबा की निंदा/आलोचना क्यों करते हैं ? इस का सीधा-सा जवाब मशहूर शायर मरहूम साहिर लुधियानवी के इस शे'र में है---"अच्छों को बुरा साबित करना,दुनिया की पुरानी आदत है " | युग-प्रवर्तकों को तो हर युग में निंदा का हलाहल पीना ही पड़ता है | वे यह विष पी कर ही तो संसार को अमृतपान करवाते हैं |     
जन्मांक-नामांक विश्लेषण 
    श्री शिरडी साई बाबा का दूसरा जन्म श्री सत्य साई बाबा के रूप में हुआ है | इन का जन्म 23-11-1926 को प्रातः 05:06 बजे आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के पुट्टपर्ती में हुआ | यह जा रहे सोमवार और आ रहे मंगलवार का समय था | तो यहाँ मंगलवार गिना जाएगा,मगर कुछ प्रभाव सोमवार का भी रहेगा | इन के जन्म का मूलांक-5,मासांक-2,वर्षांक-9, भाग्यांक-7 हुआ | चलित का अंक 3 (ऋणात्मक) था | इन की सूर्य राशि 'धनु' है | इन के मूलांक का वृहदंक 23 पितृ-कृपा का सूचक है | ऐसे लोग अपने पिछले जन्म/जन्मों की शक्ति/शक्तियाँ साथ ले कर चलते हैं | इन शक्ति/शक्तियों का परिमाण कितना रहता है,यह निर्भर करता है इस जन्म के अंकों पर | यह अंक 2 व 3 का मेल है | पहला अंक स्त्री अंक है,जब कि दूसरा अनुयायियों/अनुसरणकर्ताओं का | इस का मूलांक है-5 | अंक 2,3 व 5 का त्रिकोण सुदृढ़ मार्गदर्शन/चमत्कार-क्षमता बताता है | ऐसे लोगों की पूर्वाभास व भविष्य-कथन-क्षमता बहुत अच्छी होती है | इन के मासांक का वृहदंक 11 दो पुरुष अंकों का मेल है,जो कि एक स्त्री अंक निर्मित करते हैं | इस का तात्पर्य यह है कि ऐसे पुरुषों का जीवन स्त्रीत्व-प्रधान होता है | यदि स्त्री अंक सकारात्मक रूप से प्रधान होते हैं तो परिवार/घर की स्त्रियों का भरपूर सुख मिलता है,किन्तु यदि स्त्री अंक नकारात्मक रूप से प्रधान होते हैं तो यह सुख बिलकुल नहीं मिलता है | हाँ,अन्य स्त्रियों का प्रेम व श्रद्धा बहुत मिलती है | इन का भाग्यांक है-7 | यह भी स्त्री अंक है | इन का जन्म ऋणात्मक समय ( अंक 3 का ) में हुआ है,इस कारण स्त्री अंक विखंडित हो गये हैं | इस कारण इन पर यह बात पूरी तरह लागू होती है | इन्हें अपने परिवार की स्त्रियों का सुख बिलकुल नहीं मिला | चूँकि ये स्त्री अंक दाम्पत्य के भी होते हैं,इस लिए इन्हें दाम्पत्य सुख भी नहीं मिला | इन्होंने विवाह नहीं किया | हाँ,इन्हें परिवार के बाहर की स्त्रियों से स्नेह व श्रद्धा अपरिमित परिमाण में मिली | इन के जन्म के समय का योग भी अंक 2 ही मिलता है | यहाँ अंक 2,5 व 6 का त्रिकोण स्त्री-सुख-विखंडन भी तो सूचित कर रहा है | तनिक हमारा विश्लेषण याद कीजिए कि श्री शिरडी साई बाबा के जीवन में ठीक-ठीक यही योग था | इन के भाग्यांक का वृहदंक है-25 | कीरो के अनुसार ऐसे लोगों को प्रारंभिक जीवन में संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है | हमारी पद्धति के अनुसार अंक 2 मानस/मानसिक शक्तियों तथा अंक 5 सशक्त जाग्रत छठी इन्द्रिय व का प्रतीक है | यह अंक भविष्य-कथन-क्षमता व पूर्वाभास क्षमता के दृष्टिकोण से जातक को बहुत समृद्ध बना देता है | सत्य साई बाबा के जीवन में अंक 5 की अतिशय प्रधानता है | अब तक अंक 5 की जितनी चर्चा हम कर चुके हैं,इस के अतिरिक्त और रूप भी देखिए | इन का जन्म 05 बज कर 06 मिनट पर हुआ | 04:30 बजे से 05:30 बजे तक अंक 5 होता है | इन का संयुक्तांक,'सत्य' का अंक,'साई' का अंक,'साई अवतार' की घोषणा का मूलांक,मासांक व वर्षांक भी 5 है | वह इन की उम्र का 14 वाँ वर्ष था | इस का मूलांक भी 5 बनता है | अंक 1 व 4 पितृ अंक हैं | इन की यह 'अनुलोम अवस्था' पितृ रूप की उद्घाटक/आरंभक मानी जाती है | इन की बॉडी लैंग्वेज में भी अंक 5 अपनी पूर्ण तीव्रता के साथ उपस्थित है | इन का गोलाकार चेहरा,अधिक चौड़े नथुने,फूले व गोलीय स्वरूप-संपन्न बाल,क्लीन शेव आदि | यहाँ यह बात विशेष ध्यान देने की है कि इन के बाल जब से ऐसे हुए हैं,तभी से इनके 'साई रूप' की प्रगति सामने आयी है | अंक 5 की इसी अतिशय प्रधानता के कारण ही इन का जीवन चमत्कार-प्रधान है | विखंडित शुक्र व ऋणात्मक गुरु यानि अंक 3 व अंक 6  का साथ होने पर ही इन का जीवन चमत्कारों से 'भरा' व 'झरा' होने के योग हैं | ये अंक जीवन में दो बार साथ आते हैं | पहली बार ये अंक साथ आये 'अनुलोम अवस्था' में उम्र के 36 वें वर्ष यानि वर्ष 1961-62  में | तब से इन का जीवन चमत्कारों से 'भरा' यानि भरपूर रहना आरम्भ हुआ | ये अंक दूसरी बार साथ आये 'प्रतिलोम अवस्था' में उम्र के 63 वें वर्ष यानि वर्ष 1988-89 में | | तब से इन का जीवन चमत्कारों से 'झरा' यानि हल्का होना शुरू हो जाता है | इसी प्रकार इन के जीवन पर स्त्री अंकों (अंक 2 व 7 ) का दायरा भी साफ़ तौर पर देखा जा सकता है | अपनी 'अनुलोम अवस्था' में ये अंक उम्र के 27 वें वर्ष यानि वर्ष 1952-53 में आये | तब से इन की बाह्यावास्था में अतिशय वृद्धि हुई | ये स्त्री अंक अपनी 'प्रतिलोम अवस्था' में उम्र के 72 वें वर्ष यानि वर्ष 1997-98 में आये | तब से इन की बाह्यावास्था में कमी होनी शुरू हो गयी | ये स्त्री अंक इन जीवन पर एक और रूप में भी प्रभावी हैं | वैसे तो इन के जन्म की दिनांक को मंगलवार था,मगर चूँकि वह सूर्योदय से पहले का समय था;इस लिए सोमवार का भी प्रभाव रहेगा | सोमवार के अंक ये ही स्त्री अंक (2 व 7 ) होते हैं | इन के जन्म के दिन मंगलवार का अंक है-9 | स्त्री अंकों के साथ अंक 9 की इस युति का एक फल यह भी है कि इन का सारा बल सामाजिक सद्भाव व समन्वय पर है,इसी लिए इन्होंने कोई नया पंथ या धर्म न चला कर सभी को यह कहा कि वे अपने-अपने सामाजिक व धार्मिक/सांप्रदायिक दायरे में रह कर ही अपना मानव-धर्म/कर्त्तव्य निभाएँ | इन के जन्म के वर्ष का वृहदंक है-18 | कीरो के अनुसार यह अंक क्रांतियों व सामाजिक उथल-पुथल से लाभ दिलाता है | हमारी 'युग्म अंक पद्धति' के अनुसार यह अंक पितृ-द्रोह का अंक है | यह युति 'पितृ द्रोह युति' कहलाती है | ऐसे लोगों को पितृ सुख या तो बहुत कम या फिर नहीं ही मिलता है | इन के जन्म व स्थायी निवास-स्थान 'पुट्टपर्ती' का अंक बनता है-8 | अंक 18 से इस अंक की युति इस के फल में वृद्धि करती है | श्री सत्य साई बाबा का जीवन भी यही बताता है | इन्हें बहुत कम व बाधित पितृ सुख मिला | इन अंकों के साथ विखंडित अंक 6 (शुक्र) व स्त्री अंकों (2 व 7 ) की युति चारित्रिक आक्षेप लगवाती है | इसी कारण श्री सत्य साई बाबा पर भी कुछ ऐसे आक्षेप लगे हैं | किन्तु यह युति मात्रा आक्षेपक है,आपराधिक नहीं | इस कारण बाबा पर मात्र आक्षेप ही लगे हैं,ये अपराधी नहीं ठहरे |                      
श्री सत्य साई बाबा के बचपन का नाम था-'सत्यनारायण राजू' | इस का मूलांक बनता है-5 | इन के जीवन में अंक 5 की प्रधानता का विस्तृत विश्लेषण हम इस आलेख में कर ही रहे हैं | इस का वृहदंक बनता है-41 | यह पितृ अंकों की ग्रहण-युति है | यह पितृ-सुख में बाधा बताती है,मगर साथ ही युति यह भी बताती है कि ऐसे लोगों  को स्वयं एक 'पितृ-पुरुष' के रूप में बहुत ख्याति मिलती है | 'सत्यनारायण' का अंक बनता है-4 | यह पितृ अंक है | इस का वृहदंक है-31 | यह युति ज्ञानाधारित मार्गदर्शन तथा नेतृत्व-गत निर्णयों व सफलता सूचित करती है | अंक 1,3 व 4 का त्रिकोण भी पितृ-पुरुष के रूप में उक्त बातों की ही पुष्टि मरता है | 'राजू' का अंक है-1 | यह प्रबल पितृ अंक है | यह बहुत ही शुभ अंक है | इस का वृहदंक है-10 | यह सर्वाधिक शुभ अंक है | इसे 'सौभाग्य चक्र का अंक' कहते हैं | ऐसे लोगों को ख़ूब सम्मान,आदर व यश प्राप्त होता है | इन की सभी योजनाएँ सफल होती हैं | इन का बाद का और अभी सर्व प्रचलित नाम है-'सत्य साई बाबा' | 'सत्य' का अंक है-5,जिस का वृहदंक है-14 | हम इन की बात पहले कर चुके हैं | 'साई' का अंक 5 व 'बाबा' का अंक है-6  | इन दोनों ही अंकों के प्रभाव की बात भी हम कर चुके हैं | इन के इस नाम का अंक बनता है-7,जिस का वृहदंक बनता है-25 | इन के भाग्यांक की चर्चा में हम इन अंकों की बात कर चुके हैं |  
अंक कुंडली-विश्लेषण 
   अब बात करते हैं सत्य साई बाबा की जन्म की अंक कुंडली की | इस में मात्र दो युतियाँ बन रही हैं-एक क्षैतिज व दूसरी ऊर्ध्वाधर | क्षैतिज युति में एक गुरु के साथ तीन सूर्य व एक मंगल है | यह प्रबल आध्यात्मिक अवस्था बताती है | ऐसे लोग प्रकांड विद्वान्,प्रखर वक्ता तथा सशक्त प्रेरक व मार्गदर्शक होते हैं | शुभांकों की उपस्थिति में इस युति का फल बढ़ जाता है | सत्य साई बाबा के यहाँ जन्मांकों व जन्मदिन मंगलवार के कारण यह युति वृद्धिमान अवस्था में है | इन की ऊर्ध्वाधर युति में एक गुरु,एक शुक्र व दो चन्द्रमा हैं | यह युति स्त्री अंकों की        


वही नकारात्मक अवस्था बताती है,जिस की चर्चा हम पूर्व में कर चुके हैं | इसी युति के कारण ही अंक 5 की अतिशय प्रधानता के बाद भी सत्य साई बाबा की बॉडी लैंग्वेज में चपलता नहीं,शिथिलता है | इन की अंक कुंडली में प्रकट की अपेक्षा परोक्ष युतियाँ अधिक प्रभावी हैं | 
कब होगा देहांत ?
वैसे तो श्री सत्य साई बाबा ने स्वयं यह कहा रख है कि वे 93 वें वर्ष तक यह शरीर रखेंगे;तथा उस के 8 साल बाद फिर जन्म लेंगे | यह तो बात हुई बाबा के कहने कि,मगर हम अंकज्योतिष के गणित से देखते हैं कि बाबा का देहांत व अगला जन्म कब होगा ? शिरडी साई बाबा के देहांत का भाग्यांक है-8 | इसे उन के देहांत के वर्ष 1918  में जोड़ने पर वर्ष आता है-1926 |  यह शिरडी साई बाबा के के दूसरे जन्म यानि सत्य साई बाबा के जन्म का वर्ष है | जन्म के कारक अंक हैं-1 व 2 | शिरडी साई बाबा की आयु थी-81 वर्ष | इस में जन्म के कारक अंकों की 'अनुलोम अवस्था' जोड़ने पर आता है-93 वर्ष | यह बाबा के दूसरे जन्म यानि सत्य साई बाबा के शरीर की आयु है | इस का तात्पर्य यह हुआ कि सत्य साई बाबा का देहांत वर्ष 2019 में होगा | इन का जन्म का चलित अंक है-3 (ऋणात्मक ) | वर्ष 2019 में अंक 3 दो बार आएगा | पहली बार 20 फरवरी से 20 मार्च तथा दूसरी बार 21 नवम्बर से 19 दिसंबर तक | 7 दिन संक्रमण काल के जोड़ दें तो यह अवधि 27 मार्च और 26 दिसंबर तक हो जाती है | अब हमारे गणित काल में 20 फरवरी से 27 मार्च वाली अवधि अधिक उपयुक्त ठहरती है | फिर भी कमोबेश यह वर्ष 2019 ही रहना है,ऐसी आशा है | सत्य साई बाबा के देहांत का दिन मंगलवार,बुधवार या गुरुवार हो सकता है,क्यों कि इन के सर्वाधिक प्रभावी अंक हैं-3,5 व 9 | 'पुनर्क्रम निर्धारण पद्धति' से देखा जाए तो सत्य साई बाबा के देहांत का मूलांक/भाग्यांक 2,4 य़ा 7 हो सकता है | 
अगला जन्म कब ?
    मित्रो,अब इस चर्चा में कुछ बातें शिरडी साई बाबा वाले आलेख से दोहरानी पड़ेंगी | ऐसा करने के पीछे हमारा उद्देश्य पिष्टपेषण करना नहीं है | ऐसा करना इस विषय को सम्पूर्णतः विश्लेषित करने के लिए आवश्यक है | अभी विगत विश्लेषण में हम ने देखा कि सत्य साई बाबा के देहांत का वर्ष ठहरता है-2019 | इस में देहांत के कारक अंक 8 को जोड़ने पर इन के अगले जन्म का वर्ष मिल जाता है;और यह आता है-2027 | 
 बाबा का पहला जन्म हुआ अंक 2 के वर्ष में यानि कि वर्ष 1838 में | बाबा का दूसरा जन्म हुआ अंक 9 के वर्ष में यानि कि वर्ष 1926 में | 'पुनर्क्रम निर्धारण विधि' से बाबा का अगला जन्म अब फिर से अंक 2 के ही वर्ष में होना है | अब प्रश्न उठता है कि यह वर्ष कौनसा होगा ? तो यह जानने के लिए बाबा के पहले जन्म के अंकों की शरण में चलते हैं | बाबा के पहले जन्म के मूलांक का वृहदंक है-27 व वर्ष का वृहदंक है-20 | इस युति को पहले तो सीधे-सीधे देखें तो यह वर्ष बनता है-2720,जो कि दूसरे जन्म की वर्तमान अवस्था को दृष्टिगत रखते हुए संभव नहीं है,क्यों कि दैहिक धर्म की भी अपनी सीमा होती है | बाबा के दूसरे जन्म के शरीर की वर्तमान अवस्था लगभग चौरासी साल है,और वर्ष 2720 से कुछ वर्ष पहले भी इस की पूर्णाहुति मान ली जाए,तब भी यह देह-यात्रा लगभग 800 वर्ष की हो जाएगी,जो कि दैहिक धर्म के अनुकूल नहीं बैठ रही है | अब बात करते हैं दूसरे विकल्प की | दूसरा विकल्प यह है कि जन्म के वर्ष और मूलांक के संयुक्तांक की 'विरुद्ध युति' बना ली जाए | यह युति बनती है-वर्ष 2027 | बाबा के पहले जन्म के पहले जन्म के अंकों से ये दो ही विकल्प बनते हैं | इस प्रकार बाबा के तीसरे जन्म का वर्ष ठहरता है-2027 | एक और विधि भी है | जन्म के कारक अंक होते हैं-1 व 2 | अंक 1 पुरुष व अंक 2 स्त्री का होता है | इन के मेल से अंक 3 का जन्म होता है | इस बात को सांसारिक या दैहिक स्तर पर इस प्रकार समझिए कि पुरुष व स्त्री के मेल से संतान पैदा होती है | तब अंक 1 पिता व अंक 2 माता का हो जाता है |  अब तनिक यह भी देख लिया जाए कि वर्ष 2027 में किस समय में बाबा फिर से अवतरित होंगे ? बाबा का पहला जन्म हुआ अंक 6 ( ऋणात्मक) में | उन का दूसरा जन्म हुआ अंक 3 (ऋणात्मक) में | अंक 3,6 व 9 के समूह का अब शेष रहा अंक है-9 | अब इसी का क्रम है | अंक 9 एक कैलेण्डर वर्ष में दो बार आता है | 21 मार्च से 20 अप्रेल (धनात्मक) और 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर (ऋणात्मक) | इस में भी 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर वाली अवधि अधिक जमती है,क्यों कि पहली बात तो यह कि इस में चलित की ऋणात्मकता की क्रमबद्धता जारी रहती है,दूसरी बात यह कि बाबा के पहले जन्म के देहांत के 9 वें वर्ष में दूसरा जन्म हुआ | अब तीसरे जन्म के वर्ष 2027 में इस परिधि में तो 21 अक्टूबर से 20 नवम्बर वाला समय ही आ रहा है | इस में यदि संक्रमण काल के सात दिन सम्मिलित कर लिये जाएँ तो यह अवधि बढ़ कर 27 नवम्बर तक हो जाती है | उस दिनांक को गुरुवार,मंगलवार या शुक्रवार हो सकता है | इस नाते अक्टूबर महीने की 21 और नवम्बर महीने की 5,9,11,18 व 23 तारीख़ मिलती है | फिर भी मोटे तौर पर यह वर्ष 2027 ठहरता है | एक बात और | बाबा के अगले जन्म के शरीर की आयु 105 वर्ष सम्भव है | 
           मित्रो,इस प्रकार हम शिरडी साई बाबा के तीनों जन्मों के बारे में बात कर चुके हैं | अपनी व्यक्तिगत मान्यता के ढाँचे में हो सकता है कि कोई व्यक्ति हमारी इन बातों से असहमत हो | अपनी असहमति का सब को अधिकार है | मगर ऐसे असहमत बंधुओं से हम यह निवेदन करना चाहेंगे कि वे इस विश्लेषण को किसी भक्त/श्रद्धालु की दृष्टि से न सही,किन्तु अंक ज्योतिषीय विश्लेषण-क्षमता से परिचित होने के दृष्टिकोण से ही अवश्य पढ़ें | आप के सुझावों का तो सदा ही स्वागत है | आज बस इतना ही | जय साई नाथ |........ अब आज के आनंद की जय | ........... जय श्री राम |