गुरुवार, 23 सितंबर 2010

लुधियाना ज्योतिष सम्मेलन :::18-19 सितम्बर,2010

जय श्री राम ............ | आदरणीय मित्रो,आज जो बात आप से करने जा रहे हैं,वह परसों या कल भी की जा सकती थी | आज पर टालने की एक ख़ास वजह है | दस महीने की उम्र में BLOGSPOT वाले इस ब्लॉग की यह ९९ वीं पोस्ट है | अध्यात्म और परा विद्याओं में अंक ९ का विशेष महत्त्व है | ९९ में अंक ९ दोहरी भूमिका में बैठा है | अब आप यह भी कह सकते हैं कि भई,इस बात का पोस्ट परसों,कल या आज डालने से क्या सम्बन्ध ? परसों या कल की हालत में भी पोस्ट तो ९९ वीं ही रहती न | मित्रो,बात यहाँ तक तो सही है,किन्तु जो आज के अंक हैं,वे परसों या कल कहाँ से आते ? आज का मूलांक ५ तथा भाग्यांक ८ है | लेखन,ज्योतिष और लिपिबद्धता के लिए अंक ५ का आशीर्वाद होना बहुत ज़रूरी है | साथ ही आज गुरुवार है,जिस अंक है-३ | ज्योतिष और लेखन में इस की भूमिका भी बहुत महत्त्वपूर्ण है | अंक ८ अंक ५ व अंक ३ के साथ बैठ कर भविष्य-कथन क्षमता प्रबल करता है | तो अब आप समझ ही गए हो नगे यह चर्चा आज करने का तात्पर्य | इस चर्चा का विस्तार से उल्लेख करने के पीछे कारण यह है कि यह ब्लॉग पढ़ कर अंक ज्योतिष सीखने वाले हमारे मित्र इन समीकरणों को आसानी से समझ सकें |
                आज आप से बात करनी है-लुधियाना ज्योतिष सम्मेलन की | यह सम्मेलन विगत १८ और १९ तारीख को भाई रंधीर सिंह नगर के आई ब्लाक के सामुदायिक केंद्र में आयोजित हुआ | पहले दिन तो बिलकुल फ्लॉप रहा | दूसरे दिन स्थिति अपेक्षाकृत ठीक रही | पहले दिन हमारे व्याख्यान का विषय वही रहा,जो कि अभी पिछली जुलाई में भोपाल में था | दूसरे दिन हमारे व्याख्यान का विषय था---" जन्मांक त्रिकोण " | यह सर्वथा नवीन था | यह हमारे ही शोध का परिणाम है |
               मित्रो,अंक ज्योतिष में अंक कुंडली से जातक का व्यक्तित्व-विश्लेषण तथा उस से सम्बन्धित भविष्य-कथन भी किया जा सकता है | जन्मांक त्रिकोण से भी ऐसा ही किया जा सकता है |
  जातक के जन्म की दिनांक के दोनों अंकों का योग कर लीजिए | जैसे---किसी की जन्म-दिनांक १८ है तो इस का मूलांक हुआ---१+८=९ | यह त्रिकोण के 'A' हुआ | अब जातक के जन्म के महीने को लीजिए | यदि किसी के जन्म का महीना अक्टूबर है तो उस का मूलांक हुआ---१+०=१ | यह 'B' हुआ | इसी प्रकार जातक के जन्म का वर्षांक लेना है | यह शताब्दी सहित लेना है | जैसे---जातक का जन्म १९७४ में हुआ है तो मूलांक हुआ---१+९+७+४=२१=३ | यह 'C' हुआ | अब यदि इस जातक के निजी जीवन के बारे में बात करनी है तो 'A' और 'B'  को लीजिए | इन की युति की संगतता और असंगतता पर विचार कीजिए | यहाँ अब एक और त्रिकोण बनता है---'A','B' और इन के योग से प्राप्त होने वाले मूलांक का | इस त्रिकोण को हम 'आधार उपत्रिकोण' कहेंगे | यहाँ 'A' और 'B' के योग से प्राप्त मूलांक भाग्यांक जितना महत्त्वपूर्ण होता है | यदि जातक के करियर के बारे में बात करनी है,तो 'A' और 'C' को काम लेते हैं | इन की संगतता और असंगतता देखी जाती है | यहाँ 'A' और 'C' और इन के योग से प्राप्त होने वाले मूलांक से एक उपत्रिकोण बनता है | इसे 'वाम शीर्ष उपत्रिकोण' कहते हैं | इस से जातक के करियर यानि नौकरी/व्यवसाय के बारे में जाना जा सकता है | यदि जातक के सामाजिक/पारिवारिक जीवन के बारे में जानना है तो 'B' और 'C' की संगतत और असंगतता पर विचार किया जाता है | इन दोनों और इन के योग से प्राप्त मूलांक से बनने वाले उपत्रिकोण का विश्लेषण किया जाता है | इस उपत्रिकोण को 'दक्षिण शीर्ष उपत्रिकोण' कहते हैं | यहाँ उल्लेखित पारिवारिक जीवन निजी जीवन से भिन्न है | इस प्रकार इस जन्मांक त्रिकोण से जातक के बारे में बहुत कुछ विश्लेषित और भविष्यवाचित किया जा सकता है |
           मित्रो,आज तो बस इतना ही | कल ब्लॉगपोस्ट  वाले हमारे ब्लॉग की १०० वीं पोस्ट के रूप में हम आप के साथ एक बहुत ही बड़ी और दिल ख़ुश कर देने वाली बात करेंगे | अब आज्ञा दीजिए | ........ आज के आनंद की जय | .......... जय श्री राम |