गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव 2014 : मुक़ाबला बहुत रोचक है



   जय श्री राम ........... आदरणीय मित्रो, कल पिछली पोस्ट में हमने झारखण्ड विधानसभा चुनाव की बात की थी| अब करते हैं जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव की|
  
             जम्मू और कश्मीर  
           निर्माण-दिनांक:-26-10-1947
मूलांक:-8     भाग्यांक:-3     आयु-अंक:-5 (68 वाँ वर्ष)    नामांक:-8     चलित दशा:-अंक 6 (वर्ष 2019 तक)
          मतगणना-दिनांक:-23-12-2014
मूलांक:-5    भाग्यांक:-6       दिन-अंक:-9 (मंगलवार)     चलित अंक:-8
चुनावी वर्षांक:-7 (2014)      विधानसभा-अंक:-1 (10 वीं विधानसभा)
                     जम्मू-कश्मीर का मूलांक 8 व नामांक 8 और भाग्यांक 3 में परस्पर मित्र युति है| राज्य के आयु-अंक 5 के साथ अंक 3 मित्र युति में है, किन्तु अंक 3 के साथ अंक 5 प्रबल विरोधी युति में है| अंक 5 के साथ अंक 8 विरोधी युति में है, किन्तु अंक 8 के साथ अंक 5 समभाव युति में है| अंक 3 निर्णय/चुनाव का, अंक 8 लोकतंत्र का व अंक 5 अस्थिरता का प्रतीक है| इनके साथ चुनावी वर्षांक 7 की युति यह बताती है कि इस बार के चुनाव के बाद यहाँ की लोकतान्त्रिक अस्थिरता बनी रहेगी यानि किसी एक दल की सरकार नहीं बन पाएगी| स्त्री अंक 7 के कारण इस बार भी सरकार गठबंधन की बनेगी| इस राज्य के निर्माण का चलित अंक 9 है| यह इस राज्य की राजनीतिक स्थिति में उपर्युक्त अवस्थाओं को बलिष्ठ करता है| राज्य को अभी अंक 6 की दशा चल रही है| यह वर्ष 2019 तक चलेगी| अंक 6 की अंक 3 के साथ स्थिति अंक 5 की ही तरह है| इस कारण इस अवधि में सरकार या सरकार का मुखिया (मुख्यमंत्री) बदल सकता है| इस राज्य के नाम की अंग्रेजी वर्तनी में परिवर्तन किया जाना श्रेयस्कर रहेगा| तब न सिर्फ़ यहाँ राजनीतिक स्थिरता आ सकेगी, बल्कि आतंकवाद व पाकिस्तानी घुसपैठ की बीमारी भी नियंत्रण में आ सकेगी या समाप्त की जा सकेगी| इस बार की विधानसभा का अंक 1 राज्य के मूलांक 8 व नामांक 8 के साथ प्रबल विरोधी युति बनता है| यह युति सत्ता/सरकार के विरुद्ध जाती है| अतः इस बार बनने वाला मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हो, ऐसा नहीं लगता| यदि नेशनल कांफ्रेंस प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में सत्ता में भागीदार हुई तो उमर अब्दुल्ला को मुख्यमंत्री-पद मिलता नहीं दिख रहा है| हाँ, कांग्रेस या नेशनल कांफ्रेंस में से कोई एक दल इस बार सत्ता में भागीदार या सहायक हो जाए तो अचम्भा नहीं होना चाहिए|
          आइए, अब बात करते हैं हमारी गणना के विभिन्न चक्रों की|
                       प्रथम चक्र  
        भाजपा
  मूलांक:-0       भाग्यांक:-0       आयु-अंक:-5+       नामांक:-3+
     कुल:-8+/4=2+
       अमित शाह    
  मूलांक:-2-       भाग्यांक:-6+      आयु-अंक:-0       नामांक:-0
     कुल:-4+/4=+
        जुगल किशोर शर्मा  
  आयु-अंक:-6+       नामांक:-0
     कुल:-6+/2=3+
  भाजपा+अमित शाह+जुगल किशोर शर्मा=6+/3=2+

       नेशनल कांफ्रेंस
  मूलांक:-3+       भाग्यांक:-9+      आयु-अंक:-2-       नामांक:-0
     कुल:-10+/4=2.5+
       फ़ारुख अब्दुल्ला  
  मूलांक:-9+       भाग्यांक:-0      आयु-अंक:-0       नामांक:-0
      कुल:-9+/4=2.25+
  नेकां+फ़ारुख अब्दुल्ला=4.75+/2=2.37+
            कांग्रेस
  मूलांक:-3+       भाग्यांक:-0       आयु-अंक:-0        नामांक:-9+
     कुल:-12+/4=3+
       सोनिया गांधी
  मूलांक:-0       भाग्यांक:-4+      आयु-अंक:-0       नामांक:-0
      कुल:-4+/4=+
       सैफ़ुद्दीन सोज़  
  मूलांक:-4+       भाग्यांक:-0      आयु-अंक:-0       नामांक:-4+
      कुल:-8+/4=2+
    कांग्रेस+सोनिया गांधी+सैफ़ुद्दीन सोज़=6+/3=2+

       पी डी पी
  आयु-अंक:-6+       नामांक:-=6+
      कुल:-12+/2=6+
       मेहबूबा मुफ़्ती  
  मूलांक:-2-       भाग्यांक:-0      आयु-अंक:-3+       नामांक:-3+
      कुल:-4+/4=+
     पी डी पी+मेहबूबा मुफ़्ती=7+/2=3.5+

                         द्वितीय चक्र
  भाजपा=2+
  कांग्रेस=2+
  नेशनल कांफ्रेंस=2.37+
  पी डी पी=3.5+
      कुल=9.87+
                  तृतीय चक्र
         कुल सीटें=87
  भाजपा=2+/9.87=20.26#87=17.62=18 सीटें/कम-ज़्यादा 3;   
  कांग्रेस=2+/9.87=20.26#87=17.62=18 सीटें/कम-ज़्यादा 3;   
  नेशनल कांफ्रेंस=2.37+/9.87=23.30#87=20.27=20 सीटें/कम-ज़्यादा 4;   
  पी डी पी=3.5+/9.87=35.46#87=30.85=31 सीटें/कम-ज़्यादा 6;  

           यहाँ विशेष ध्यान दिए जाने योग्य बात यह है कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा का पूर्ण जन्म-विवरण उपलब्ध नहीं है| अतः भाजपा की सीटों के मामले में कुछ और अंतर आ सकता है| यह अंतर इसे दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बना सकता है| इसी प्रकार पी डी पी के बारे में कहा जाएगा| इसका सिर्फ़ नामांक व आयु-अंक काम लिया गया है| इस कारण इसके यहाँ भी सीटों के मामले में कुछ अंतर आ सकता है| यह अंतर इतना भी हो सकता है कि भाजपा व इसके बीच सीटों का फ़ासला अधिक न रहे|
           इस विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि यहाँ कोई भी दल अकेले अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में दिखाई नहीं दे रहा है| बहुमत के जादुई आंकड़े 44 को पाने के लिए इस गठबंधन तो करना पड़ेगा| अब यह रोचक बात रहेगी कि कौन किसके साथ आएगा या जाएगा?
           हमारी ये सारी गणनाएँ इस पर आधारित हैं कि हमने भाजपा, कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पी डी पी को ही मैदान में माना है| इनके अतिरिक्त अन्य दलों या निर्दलियों को हमने अपनी गणना के दायरे से बाहर माना है| स्पष्ट है कि उनकी उपस्थिति से सीटों के मामले में कुछ तो अंतर आ ही जाएगा|
           अब मिलेंगे अगली पोस्ट के साथ| ......... आज के आनंद की जय| ........... जय श्री राम|