मंगलवार, 17 जुलाई 2012

इंदौर ज्योतिष सम्मलेन : अंक 6 व अंक 8 वाली महिलाओं का दाम्पत्य

                 जय श्री राम ............| आदरणीय मित्रो, आपसे बात किये कुछ दिनों का अंतराल आ गया| सोच तो यह रखा था कि आपसे अभी वाली बात इंदौर से लौट कर तुरंत करेंगे, मगर आगे से आगे बनी रही व्यस्तता ने इसके लिए अवकाश ही नहीं दिया| इस चक्कर में कुछ दिनों की 'आज की हस्ती' की चर्चा भी नहीं हो पायी है| ... कोई बात नहीं, जैसी हमारी 'कृपात्रयी' की इच्छा|    
                  विगत 7 व 8 जुलाई को इंदौर (म.प्र.) में श्री दुर्गा ज्योतिष एवं रत्न अनुसन्धान संस्थान की ओर से ज्योतिष सम्मेलन आयोजित किया गया| श्री हरिओम जोशी और स्वामी शिव आनंद मेहता ने अपने तंई एक अच्छे ज्योतिष सम्मेलन का आयोजन किया| सभी व्यवस्थाएँ बढ़िया रखी गयीं| इनकी तरफ़ से ज्योतिष सम्मेलन आयोजित करने की यह एक ईमानदार कोशिश थी, जो कि निश्चित रूप से सराही जानी चाहिए| इस प्रयास के लिए स्वामी शिव आनंद मेहता और हरिओम जोशी बधाई के पात्र हैं| महात्मा गांधी हॉल में आयोजित इस सम्मेलन के पहले दिन यानी 7 जुलाई को हमें अवसर मिला व्याख्यान का| विषय था---'अंक 6 व अंक 8 वाली महिलाओं का दाम्पत्य'| इस व्याख्यान का भाव-सार यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं| भाव-सार इसलिए कि हमारे व्याख्यान लिखित नहीं होते हैं|
                    प्रत्येक माता-पिता का यह स्वप्न होता है कि उनकी बेटी विवाह के बाद पूर्ण रूप से सुखी और संपन्न अवस्था में अपना जीवन व्यतीत करे| इसलिए वे अपनी लड़की के लिए ऐसा लड़का खोजने का प्रयास करते हैं कि जो उसे इतना सुखी रख सके| अपनी इस आकांक्षा के साथ यदि वे अपनी पुत्री के दाम्पत्य के ज्योतिषीय विश्लेषण को भी ध्यान में रखें तो भविष्य के गर्भ में छिपे बेटी के सुख-दु:ख को समझ लेंगे और बेटी के विवाह को लेकर कोई भी निर्णय अधिक सुदृढ़ता से कर पाएंगे|  
                   अंक 6 व अंक 8 का किसी भी व्यक्ति के जन्मंकों में प्रधानतः संयोग दो प्रकार से होता है-पहला तो मूलांक 6 व भाग्यांक 8 के रूप में और दूसरा मूलांक 8 व भाग्यांक 6 के रूप में| यहाँ यह भी ध्यान दिए जाने वाली बात है कि मूलांक में अंक 6 तीन तरह से बनता है-6, 15 व 24 से| इसी प्रकार मूलांक में अंक 8 भी तीन तरह से बनता है-8, 17 व 26 से| भाग्यांक में यह क्रम बहुत आगे तक जाता है| यहाँ फिर अंक 6 इस तरह बनता है-33, 42, 51, 60, 69, 78, 87 व 96| इसी तरह अंक 8 इस तरह बनता है-35, 44, 53, 62, 71, 80, 89 व 98| सूक्ष्म विश्लेषण की स्थिति में अंक 6 व अंक 8 के वृहदंक की आवश्यकता पड़ती है|
                   मूलांक 6 व भाग्यांक 8 वाली लड़की विवाह-पूर्व की स्थिति में यदि भरे बदन, गोल या आयताकार भरे चेहरे, ओछी गर्दन की है तो उसे विवाहोपरांत बहुत कष्टपूर्ण दांपत्य झेलना पड़ता है| यदि उसकी ठुड्डी नुकीली है तो उसे 'सौतन योग' होता है| साथ ही यदि उसका गला लटका हो तो वह महिला शराबनोशी करने वाली भी हो सकती है| यहाँ यह बात भी द्रष्टव्य है कि यदि उस महिला के जन्म का चलित अंक, मासांक या वर्षांक भी अंक 6 है तो उपर्युक्त बातों का प्रतिशत अधिक रह सकता है| ऐसी महिला के हाथ और हथेलियाँ छोटी हैं तो उसके दांपत्य की स्थिति बहुत विस्फोटक भी हो सकती है| यदि अंक 15 से मूलांक 6 बना है तो पति से तन और धन का सुख बुरी तरह बाधित रहता है| यदि यह मूलांक 24 से बना है तो ऐसी महिला का पारिवारिक ताना-बाना बिखर कर रह जाता है| उस महिला को तो अपनी संतान का सुख भी नहीं मिल पाए तो भी कोई अचम्भा नहीं होना चाहिए| उसे तो पति के साथ-साथ परिवार से भी सुख नहीं मिलता है|
                     मूलांक 8 व भाग्यांक 6 वाली लड़की का दाम्पत्य तो अपने जन्म (विवाह) के साथ ही अलगाव नियत करवा कर लाता है| ऐसी महिला का दांपत्य प्रायः 6 से 8 सालों में अलगाव में बदल जाता है| अब यह अलगाव औपचारिक रूप ले लता है या अनौपचारिक रूप में रहता है, यह तो अन्य अंकों की सहयोगी युतियों पर निर्भर करता है| हाँ, इसमें उस महिला के जीवनसाथी के अंक भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं| ऐसी महिला सुख-भोग तो करती है, किन्तु वह सुख-भोग पति की अपेक्षा अन्य माध्यम से होता है| सहयोगी अंकों में अंक 6 के भ्रष्ट होने की अवस्था में यह महिला नशीली दवाओं की आदी भी हो सकती है| यदि यह महिला भरे बदन, गोल व भरे चेहरे, चौड़े नथुनों, औसत से बड़ी आँखों वाली, भारी गले, भारी हाथों और भरी हथेलियों वाली है तो इसके उपर्युक्त गुणावगुणों का प्रतिशत बढ़ जाता है| ऐसी महिला का संतान का सुख तो मिल सकता है, मगर पति या पति-पक्ष का सुख प्रायः नहीं ही मिलता है|        
                       सभी ज्योतिष सम्मेलनों की तरह यहाँ भी हमें सम्मानित किया गया| इसके लिए आयोजकों का आभार| ... अब आज देर बहुत हो चली है| अब कल बात करेंगे| ......... आज के आनंद की जय| ............ जय श्री राम|