अंक ज्योतिषी, अंग ज्योतिषी, राजनीतिक विश्लेषक-सलाहकार, नाटककार, शायर, अकादमिक, सम्प्रेरक वक्ता

मंगलवार, 18 अप्रैल 2023

कर्नाटक विधान सभा चुनाव : 2023-भाग-1 : भाजपा के लिए "बहुत कठिन है डगर पनघट की"

जय श्री राम ……… आदरणीय मित्रो, आपकी सेवा में पुनः प्रस्तुत हैं। हमारी ‘कृपात्रयी’ (प. पू. गुरुदेव देवरहा बाबा, माँ बगलामुखी और घोटेवाले) एवं माँ हिंगलाज भवानी की कृपा से हम अभी हम आपके लिए लाये हैं कर्नाटक विधान सभा चुनाव का आकलन। हमने 32 विधियों से आकलन करने के उपरान्त आपके लिए यह निष्कर्ष निकाला है। हम ऐसा कोई दावा नहीं करते कि मतगणना का परिणाम रहेगा। मतगणना का अपरिणाम तो वही रहेगा, जो कि हमारे राष्ट्र का महान् मतदाता निश्चित करेगा। हमारा यह आकलन मात्र इसका प्रयास है कि आपको अंक ज्योतिष के इस समृद्ध स्वरूप से परिचित करवाया जाए।
निर्माण-दिनांक:-01-11-1956 (गुरुवार)
मूलांक:-1                भाग्यांक:-6          आयु-अंक:-4 (67 वाँ)         नामांक:-1            
दिन-अंक:-3             मासांक:-2           वर्षांक:-3                        चलित-अंक:-9
 
कुल सीटें:-224                                  विधान सभा अंक:-7 (16 वीं) 

मतदान:-10 मई (बुधवार)                      
मतगणना:-13 मई (शनिवार)
मूलांक:-4          भाग्यांक:-7           दिन-अंक:-8           मासांक:-5           वर्षांक:-7           चलित अंक:-6

                               कर्नाटक राज्य के निर्माण का मूलांक व नामांक 1 मतगणना के मूलांक 4 के साथ जहाँ एक ओर ग्रहण योग बनाता है, वहीं दूसरी ओर विरोधी युति भी बनाता है। इन अंकों में पितृदोष की अवस्था है। राज्य के निर्मांक का मूलांक 1 व इसका नामांक 1 मतगणना के दिन-अंक 8 के साथ पारस्परिक प्रबल विरोधी युति बनाता है। इसे ‘पितृ द्रोह युति’ भी कहते हैं। जहाँ अंक 1 और 4 की पितृदोष की अवस्था व ग्रहण योग की अवस्था वर्तमान नेतृत्व के लिए अशुभ है, तो वहीं दूसरी ओर अंक 1 और 8 की यह पितृ द्रोह की युति वर्तमान नेतृत्व के लिए प्रबल विपरीतता बताती है। राज्य के निर्माण का आयु-अंक 4 मतगणना के मूलांक 4 के साथ तो मित्र युति में है, किंतु मतगणना के दिन-अंक 8 के साथ पारस्परिक प्रबल विरोधी युति बनाता है। यह युति वर्तमान नेतृत्व के लिये घोर अशुभदायक है। इसका तात्पर्य यह हुआ कि वर्तमान मुख्यमन्त्री बासवराज बोम्मई के लिए इस बार संकेत शुभ नहीं है। उन्हें अपना पद खोना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त उन्हें अपने निर्वाचन सम्बन्धी प्रतिकूलता का सामना भी करना पड़ जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। राज्य का भाग्यांक 6 मतगणना के मूलांक 4 के साथ विरोधी युति बनाता है। यह अवस्था भी राज्य के भावी चुनावी परिदृश्य में सुख-शान्ति सम्बन्धी उठापटक बताती हैं। तत्पर्य यह है कि आगामी विधानसभा अस्थिरता से पीड़ित रहेगी। राज्य के निर्माण का मासांक 2 व चलित अंक 9 मतगणना के भाग्यांक 7, वर्षांक 7 और विधानसभा अंक 7 के साथ विरोधी युति बनाता है। यह बात भी बताती हैं कि वर्तमान विधानसभा का वृहद् स्वरूप-परिवर्तन हो सकता है। तात्पर्य यह कि भावी विधानसभा के मुखिया दल के रूप में परिवर्तन सम्भव है। इसका अर्थ यह हुआ कि वर्तमान शासक दल भारतीय जनता पार्टी को (अकेले अपने दम पर सरकार बनाने के स्वरूप) से बाहर होना पड़ सकता है। राज्य के निर्माण के वर्षांक 3 व दिन-अंक तीन मतगणना के दिन-अंक 8 के साथ मित्र युति तो बनाता है, किंतु यह मित्र युति उठापटक वाली है। गठबन्धन सदैव मित्रता वाचक रहता है। कारण यह है कि जब एक से अधिक दलों के बीच मैत्रीभाव स्थापित होता है, तभी गठबन्धन बनता है। तात्पर्य यह कि कर्नाटक में अगली सरकार ‘गठबन्धन सरकार’ के रुप में बनने जा रही है। अब बात भावी सरकार की भी कर ली जाए। राज्य के निर्माण का चलित अंक 9 मतगणना के भाग्यांक 7, वर्षांक 7, विधानसभा अंक 7, मासांक 5 और चलित अंक 6 के साथ विरोधी युति बनाता है। अंक 9 चुनावी विजय के साथ-साथ स्थिरता का भी है। चूँकि यह पाँच विपरीत अवस्थाओं में है, अतः कर्नाटक की आगामी सरकार के स्थायित्व को लेकर भी घोर संदेह है। यहाँ राज्य के निर्माण के चलित अंक 9 की मतगणना के मूलांक 4 के साथ अंगारक युति को भी जोड़ लिया जाए तो यह तथ्य उभर कर आता है कि कर्नाटक की आगामी सरकार का स्थायी भाव में पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा होता सम्भव दिख नहीं रहा है। यह सरकार बीच में ही गिर सकती है। इसके गिरने का कारण गठबन्धन के दलों के पारस्परिक मतभेद, दलगत फूट व असन्तोष होगा। तात्पर्य यह हुआ कि कर्नाटक की आगामी विधान सभा या तो अपूर्ण-अवधि-चुनाव देखेगी या फिर कम से कम दो मुख्यमन्त्री देखेगी।

कौन बनेगा मुख्यमन्त्री?

डी॰ के॰ शिवकुमार : 15-05-1962 (मंगलवार)
मूलांक:-6                भाग्यांक:-2          आयु-अंक:-7 (61 वाँ)         नामांक:-1            दिन-अंक:-9             
मासांक:-5           वर्षांक:-9                          चलित-अंक:-6

एच॰ डी॰ कुमारस्वामी : 16-12-1959 (बुधवार)
मूलांक:-7                भाग्यांक:-7          आयु-अंक:-1 (64 वाँ)         नामांक:-4            दिन-अंक:-5             
मासांक:-3           वर्षांक:-6                          चलित-अंक:-3

सिद्दारामैया : 03-08-1947 (रविवार)
मूलांक:-3                भाग्यांक:-5          आयु-अंक:-4 (76 वाँ)         नामांक:-1            दिन-अंक:-1, 4             
मासांक:-8           वर्षांक:-3                        चलित-अंक:-1, 4

बासवराज सोमप्पा बोम्मई : 28-01-1960 (गुरुवार)
मूलांक:-1                भाग्यांक:-9           आयु-अंक:-1 (64 वाँ)          नामांक:-6            
दिन-अंक:-3             मासांक:-1            वर्षांक:-7                         चलित-अंक:-8

गणनीय अंकों का संयुक्त रूप:-1, 1, 3, 4, 4, 5, 6, 6, 7, 7, 7, 8  (कुल-12)
1:-2+ 2+ - - 2+ 2- =2+                      2:-2+ 2+ 2+ 2+ 2+ - - - =7+             3:-2+ + + + + + + + =9+                  
4:-2+ 2+ 2- =2+                                5:-+ + 2- + + 2+ 2+ 2+ 2+ =10+      6:- - - 2- - - 2+ 2+ + + + = +            
7:-2+ 2+ 2+ 2+ 2+ 2+ 2+ 2+=16+   8:-2- 2- + 2- 2- - + + + 2+ =3-          9:- 2+ - - - - - - = 4-                          
                      इसके लिए हमने चार व्यक्तियों के जन्मांक व नामांक काम लिये हैं। निवर्तमान मुख्यमन्त्री बासवराज बोम्मई के अतिरिक्त कांग्रेस से पूर्व मुख्यमन्त्री सिद्दारामैया, जेडीएस से पूर्व मुख्यमन्त्री एच॰ डी॰ कुमारस्वामी और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डी॰ के॰ शिवकुमार के जन्मांकों व नामांकों के सारिणीगत विश्लेषण के बाद आप स्वयं देख सकते हैं कि हमें क्या परिणाम मिला है। यदि इन चारों व्यक्तियों के हमें उपलब्ध जन्मांक सही हैं तो आगामी सरकार के स्वरूप/गठन में एच॰ डी॰ कुमारस्वामी महत्त्वपूर्ण स्वरूप में दिखायी दे सकते हैं, यहाँ तक कि मुख्यमन्त्री या उप मुख्यमन्त्री के रूप में भी।अब यह बात बहुत रोचकता का विषय होगी कि इनके साथ का बड़ा दल कांग्रेस होगा या फिर भाजपा? यहाँ इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि कुमारस्वामी के राजयोग की प्रबलता के कारण यह सम्भव है कि यदि वे अभी मुख्यमन्त्री नहीं भी बन पाएँ, तो अपने गठबन्धन के साथी दल के साथ समझौते के कारण अभी उप मुख्यमन्त्री बनें और बाद में मुख्यमन्त्री बनें; या फिर अभी बनी सरकार गिरने के बाद मुख्यमन्त्री बन जाएँ। बासवराज बोम्मई के अंक बहुत ख़राब अवस्था में हैं। ये अंक न केवल बोम्मई, अपितु भाजपा के लिए भी बहुत हानिकारक हैं। इन ख़राब अंकों के कारण ही भाजपा जहाँ ‘मुख्यमन्त्री सहित गणना’ में 95 सीटें प्राप्त करती दिख रही है, वहीं ‘मुख्यमन्त्री रहित गणना’ में 105 सीटें प्राप्त करती दिख रही है। अपने इन ख़राब अंकों के कारण निवर्तमान मुख्यमन्त्री बासवराज बोम्मई के साथ इनमें से एक या एक से अधिक भी बातें हो सकती हैं-(1) बोम्मई अपना चुनाव हार जाएँ, (2) बोम्मई फिर से मुख्यमन्त्री न बनें और (3) मुख्यमन्त्री बन भी जाएँ तो कार्यकाल पूर्ण ना कर पाएँ और मुख्यमन्त्री बनने के 23 से 26 महीनों (अधिकतम 35 महीनों) में उनका पद छूट जाए।                      
                           कुल मिला कर तैयार रहिए कर्नाटक में पुनः एक अजूबे के लिए।           
           


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